पत्रकार और संपादक दुविधा में हैं। होना भी चाहिए, क्योंकि न्यूज़रूम बदल रहा है। हमारे बदलने या न बदलने से यह प्रक्रिया थमने वाली नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में पदनाम बदलें या न बदलें, भूमिकाएं अवश्य बदलेंगी। वैसे भी दुविधा कभी सुविधाजनक नहीं होती; यह अपने साथ भ्रांति, असमंजस और संशय लेकर आती है।
अतीत के पन्ने पलटने पर आगे का रास्ता ज़्यादा साफ़ नज़र आता है। एक दौर था जब न्यूज़रूम का मतलब 'प्रिंट' हुआ करता था। डेस्क पर कॉपी लिखना, टाइपिंग, अनुवाद, प्रूफ-रीडिंग और पेज-मेकिंग जैसे काम अलग-अलग लोग किया करते थे। उप-संपादक की भूमिका किसी पन्ने के लिए एक निर्देशक सरीखी थी। समय बदला, तकनीक बेहतर हुई और अब उप-संपादक या उसके समकक्ष पेशेवर अकेले ही कमोबेश ये सारे दायित्व निभाते हैं।
भारतीय भाषाओं के मामले में AI का हाथ अभी थोड़ा तंग है, लेकिन वह अनुवाद कर लेता है और व्याकरण की गलतियां सुधार लेता है। क्या अब भी आपको नहीं लगता कि हमें अपनी भूमिका पुनर्निर्धारित करनी पड़ेगी?
आइए एक कदम आगे चलते हैं। गूगल लैब्स के क्रिएटिव टेक्नोलॉजिस्ट कवनदीप विरदी 'नीमन लैब्स' के लिए लिखते हैं कि 2026 में न्यूज़रूम का सबसे बड़ा नवाचार बड़ी टेक टीमों से नहीं, बल्कि उन पत्रकारों से आएगा जो खुद के 'टूल्स' बना सकेंगे। इसे 'वाइबकोडिंग' कहा जा रहा है—बिना कोडिंग सीखे, केवल AI (LLM) को निर्देश (Prompt) देकर सॉफ्टवेयर बनाने की प्रक्रिया।
अब पत्रकार को सिंटैक्स (Syntax) सीखने की ज़रूरत नहीं, उसे बस अपना 'इरादा' (Intent) समझाना है। जैसे 'ज़ीन्स' (Zines) ने प्रकाशन को सुलभ बनाया, वैसे ही वाइबकोडिंग सॉफ्टवेयर निर्माण की बाधा को खत्म कर देगी। अब अनुभवी खोजी पत्रकार ही 'डेवलपर' है, क्योंकि वह जानता है कि डेटा में क्या ढूंढना है। अंततः मूल्य उसी का होगा जो मशीनी काम से हटकर कंटेंट में 'ह्यूमन वैल्यू' ऐड कर सके।
हमारा भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम कंटेंट वैल्यू चेन के किस पायदान पर खड़े हैं। इस श्रृंखला के चार प्रमुख हिस्से हैं: इनपुट (सूचना संग्रहण), आउटपुट (प्रकाशन हेतु तैयारी), डिस्ट्रीब्यूशन (वितरण) और मॉनेटाइजेशन। हमें यह समझना होगा कि हम एनालिस्ट, आर्किटेक्ट या गेटकीपर—किस भूमिका में हैं? काम का कौन सा हिस्सा व्यक्तिपरक (Subjective) है और कौन सा मशीनपरक (Automated), इसी पर सब कुछ निर्भर करेगा। किसी भी पहेली के हल की शुरुआत उसका कोई सिरा पकड़ में आने से होती है।

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